The पेरडाइस की कहानी (बिना स्पॉइलर)
कहानी 1980 के दशक के सिकंदराबाद में है। शहर की चमक से दूर, झुग्गी-बस्तियों में एक आदिवासी समुदाय रहता है। उसकी रोज़ की ज़िंदगी में भेदभाव, ताक़तवर लोगों का दबदबा और अपनी पहचान के लिए संघर्ष शामिल है। इस समुदाय के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या उसे इस देश के नागरिक के रूप में पूरा हक़ मिलेगा।
इसी माहौल में नानी का किरदार सरक्का उर्फ़ ‘जडल’ उभरता है। वह कोई पारंपरिक नायक नहीं है, फिर भी हालात उसे अपने लोगों की आवाज़ बनने की ओर धकेलते हैं। उसके सामने एक पूरी व्यवस्था खड़ी है, जो सदियों से कुछ लोगों को हाशिये पर रखती आई है। कहानी में गैंग, सत्ता और स्थानीय राजनीति के ताने-बाने भी जुड़े हैं। मोहन बाबू शिकंजा मालिक और राघव जुयाल विक्रम मालिक के किरदार में हैं।
फिल्म की टैगलाइन “Bloodshed. Violent. One man.” से साफ़ है कि यह एक कच्ची, हिंसक और तीखी एक्शन-ड्रामा है। इसमें एक अकेला आदमी उत्पीड़न के ख़िलाफ़ खड़ा होता है। आगे क्या होता है, यह परदे पर देखने के लिए छोड़ना बेहतर है।

फिल्म क्यों ख़ास है
- निर्देशन और लेखन: फिल्म का निर्देशन श्रीकांत ओडेला ने किया है। कहानी उन्होंने विनय सागर जोन्नला के साथ मिलकर लिखी है।
- कलाकार: मुख्य भूमिका में नानी हैं। उनके साथ मोहन बाबू, कायदु लोहार (सुब्बुलक्ष्मी ‘सुब्बु’), सोनाली कुलकर्णी (सम्मक्का), राघव जुयाल, संपूर्णेश बाबू (बिरयानी), विशिका (देवी), तनिकेल्ला भरणी और प्रियदर्शी पुल्लिकोंडा (MLA शंकरन्ना) नज़र आते हैं। पी. विजय कुमार एन. टी. रामा राव की भूमिका में हैं, जो कहानी के 1980 के दशक के राजनीतिक दौर से मेल खाती है।
- शैली और पृष्ठभूमि: यह मूल रूप से तेलुगु भाषा की भारतीय एक्शन-ड्रामा है। इसमें झुग्गी-बस्तियाँ, गैंग लीडर, आदिवासी समुदाय और व्यवस्थागत उत्पीड़न जैसे विषय केंद्र में हैं।
- निर्माण: फिल्म का निर्माण Sri Lakshmi Venkateswara Cinemas और IVY Entertainment ने किया है।
- लंबाई और सर्टिफ़िकेट: फिल्म लगभग 174 मिनट (2 घंटे 54 मिनट) लंबी है। भारत में इसे ‘A’ (केवल वयस्कों के लिए) सर्टिफ़िकेट मिला है।
फिल्म रिव्यू के बारे में: यह पेज फिल्म की जानकारी देने वाली गाइड है, निजी समीक्षा नहीं। फिल्म का Drama4U Score इसी पेज पर अलग से दिखाया गया है।
किन दर्शकों को पसंद आएगी
- जिन्हें तीखी, हिंसक और बड़े पैमाने की तेलुगु एक्शन-ड्रामा फ़िल्में पसंद हैं
- नानी और मोहन बाबू जैसे कलाकारों को एक साथ देखने में रुचि रखने वाले दर्शक
- सामाजिक अन्याय, जाति-समुदाय और पहचान के संघर्ष पर बनी कहानियों के शौक़ीन
- 1980 के दशक के हैदराबाद-सिकंदराबाद की पृष्ठभूमि वाली पीरियड फ़िल्में देखने वाले
- लंबी अवधि की, गहन और वयस्क दर्शकों के लिए बनी फ़िल्में पसंद करने वाले
रिलीज़ डेट और कहाँ देखें
- पेड प्रीव्यू शो (भारत): 23 सितंबर 2026
- थिएटर रिलीज़ (भारत): 24 सितंबर 2026, ‘A’ सर्टिफ़िकेट के साथ
- डिजिटल रिलीज़ (भारत): TMDB डेटा में 22 अक्टूबर 2026 की डिजिटल रिलीज़ दर्ज है, जिसके साथ Netflix का उल्लेख है।
TMDB/JustWatch के स्ट्रीमिंग डेटा में 23 अक्टूबर 2026 तक भारत के लिए कोई स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म अभी सूचीबद्ध नहीं है। इसलिए देखने से पहले Netflix पर फिल्म की उपलब्धता ख़ुद जाँच लें। फिल्म की मूल भाषा तेलुगु है। ऑडियो और सबटाइटल के विकल्प प्लेटफ़ॉर्म पर देखें। हमारे डेटा में अभी कोई ट्रेलर सूचीबद्ध नहीं है।
कलाकार
Naniभूमिका Sarakka 'Jadal'
Mohan Babuभूमिका Shikanja Maalik
Kayadu Loharभूमिका Subbulakshmi 'Subbu'
Sonali Kulkarniभूमिका Sammakka
Raghav Juyalभूमिका Vikram Maalik
Sampoornesh Babuभूमिका Biriyani
Vishikaभूमिका Devi
Tanikella Bharani
फ़ोटो: TMDB
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- The पेरडाइस की रिलीज़ डेट क्या है?
- भारत में फिल्म 24 सितंबर 2026 को थिएटर में रिलीज़ हुई। इससे पहले 23 सितंबर 2026 को पेड प्रीव्यू शो हुए थे। TMDB में इसकी डिजिटल रिलीज़ 22 अक्टूबर 2026 दर्ज है।
- The पेरडाइस ऑनलाइन कहाँ देखें?
- TMDB डेटा में 22 अक्टूबर 2026 की डिजिटल रिलीज़ के साथ Netflix का उल्लेख है। TMDB/JustWatch के स्ट्रीमिंग डेटा में 23 अक्टूबर 2026 तक भारत के लिए कोई प्लेटफ़ॉर्म अभी सूचीबद्ध नहीं है, इसलिए Netflix पर उपलब्धता जाँच लें।
- The पेरडाइस में कौन-कौन से कलाकार हैं?
- मुख्य भूमिका में नानी (सरक्का 'जडल') हैं। उनके साथ मोहन बाबू, कायदु लोहार, सोनाली कुलकर्णी, राघव जुयाल, संपूर्णेश बाबू, विशिका, तनिकेल्ला भरणी, प्रियदर्शी पुल्लिकोंडा और पी. विजय कुमार हैं। निर्देशक श्रीकांत ओडेला हैं।
- The पेरडाइस कितनी लंबी है और इसका सर्टिफ़िकेट क्या है?
- फिल्म लगभग 174 मिनट यानी 2 घंटे 54 मिनट की है। भारत में इसे 'A' सर्टिफ़िकेट मिला है, यानी यह केवल वयस्क दर्शकों के लिए है।
- The पेरडाइस की कहानी किस बारे में है?
- यह 1980 के दशक के सिकंदराबाद में बसे एक हाशिये पर रहने वाले आदिवासी समुदाय की कहानी है। यह समुदाय भेदभाव और नागरिकता के हक़ के लिए संघर्ष करता है, और नानी का किरदार इस लड़ाई के केंद्र में है।

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